संकट के समय मैंने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली।
हे यहोवा, झूठ बोलनेवाले मुँह से और छली जीभ से मेरी रक्षा कर।
हे छली जीभ, तुझको क्या मिले? और तेरे साथ और क्या अधिक किया जाए?
वीर के नोकीले तीर और झाऊ के अंगारे!
हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है!
बहुत समय से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है।
मैं तो मेल चाहता हूँ; परन्तु मेरे बोलते120:7 मेरे बोलते: जब भी इसकी चर्चा करता हूँ, में जब भी अपनी दु:खित भावनाओं को व्यक्त करता हूँ, वे अनसुना करते हैं; उन्हें किसी बात से सन्तोष नहीं होता है। ही, वे लड़ना चाहते हैं!