तूने अपने उपदेश इसलिए दिए हैं119:4 तूने अपने उपदेश इसलिए दिए हैं: उसके प्रत्येक नियम का पालन करना अनिवार्य है वरन् सदैव, हर परिस्थिति में उनका पालन किया जाए।, कि हम उसे यत्न से माने।
अपने दास का उपकार कर कि मैं जीवित रहूँ, और तेरे वचन पर चलता रहूँ119:17 तेरे वचन पर चलता रहूँ: इस काम में अनुग्रह के लिए वह पूर्णरूपेण परमेश्वर पर निर्भर था और उसने प्रार्थना की कि ऐसा जीवन सदा बना रहे कि वह परमेश्वर के वचनों का पालन करके उनका सम्मान करे।।
हाकिम भी बैठे हुए आपस में मेरे विरुद्ध बातें करते थे, परन्तु तेरा दास तेरी विधियों पर ध्यान करता रहा।
मेरी आँखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे119:37 मेरी आँखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे: व्यर्थ वस्तुओं अर्थात् निस्सार बातें, दुष्टता के कामों, वास्तविकता और सत्य के मार्ग से भटकाने वाली सब सम्भावित बातों से।; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूँ; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला। परमेश्वर की व्यवस्था पर भरोसा वाव
मैं तेरी आज्ञाओं की ओर जिनमें मैं प्रीति रखता हूँ, हाथ फैलाऊँगा और तेरी विधियों पर ध्यान करूँगा। परमेश्वर की व्यवस्था में आशा ज़ैन
उससे पहले कि मैं दुःखित हुआ, मैं भटकता था; परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूँ119:67 परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूँ: जब से में कष्टों में पड़ा उसका प्रभाव यह हुआ कि मैं भटकने नहीं पाया। उन्होंने मुझे कर्त्तव्य एवं पवित्रता के मार्ग में फिर से खड़ा कर दिया।।
अहंकारी लज्जित किए जाए, क्योंकि उन्होंने मुझे झूठ के द्वारा गिरा दिया है; परन्तु मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूँगा।
मेरा मन तेरी विधियों के मानने में सिद्ध हो, ऐसा न हो कि मुझे लज्जित होना पड़े। छुटकारे के लिये प्रार्थना क़ाफ
मेरी आँखें तेरे वादे के पूरे होने की बाट जोहते-जोहते धुंधली पड़ गईं है; और मैं कहता हूँ कि तू मुझे कब शान्ति देगा?
यदि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी न होता, तो मैं दुःख के समय नाश हो जाता119:92 मैं दुःख के समय नाश हो जाता: मैं बोझ से दबकर चूर हो जाता। दु:खों और परीक्षाओं के बोझ के नीचे में ठहर नहीं पाता।।
मैंने देखा है कि प्रत्येक पूर्णता की सीमा होती है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा और सीमा से परे है। व्यवस्था के प्रति प्रेम मीम
तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूँ, इसलिए मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूँ। व्यवस्था का प्रकाश नून
मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है119:109 मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है: उसका जीवन सदैव संकट मैं रहता था। हथेली पर रहने का अर्थ है कि झपटा जा सके।, तो भी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
मैंने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भागकर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण है।
मैंने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूँ। व्यवस्था में सुरक्षा सामेख
जितने तेरी विधियों के मार्ग से भटक जाते हैं, उन सब को तू तुच्छ जानता है, क्योंकि उनकी चतुराई झूठ है।
तूने पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल के समान दूर किया है; इस कारण मैं तेरी चितौनियों से प्रीति रखता हूँ।
मेरी आँखें तुझ से उद्धार पाने, और तेरे धर्ममय वचन के पूरे होने की बाट जोहते-जोहते धुँधली पड़ गई हैं।
इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूँ; और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूँ। व्यवस्था पर चलने की इच्छा पे
तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है119:130 तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है: घर में प्रवेश के लिए द्वार खोला जाता है, नगर में प्रवेश के लिए फाटक अत: परमेश्वर की बातों के खुलने का अर्थ है कि हम उनमें घुसकर उसकी सुन्दरता को देखें।; उससे निर्बुद्धि लोग समझ प्राप्त करते हैं।
मेरी आँखों से आँसुओं की धारा बहती रहती है, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था को नहीं मानते। व्यवस्था का न्याय सांदे
बहुत काल से मैं तेरी चितौनियों को जानता हूँ, कि तूने उनकी नींव सदा के लिये डाली है। सहायता के लिये विनती रेश
हाकिम व्यर्थ मेरे पीछे पड़े हैं, परन्तु मेरा हृदय तेरे वचनों का भय मानता है119:161 मेरा हृदय तेरे वचनों का भय मानता है: मैं अब भी तेरे वचनों का सम्मान करता हूँ। मैं तेरे विधान से टलता नहीं, चाहे आशंकाएँ हों या भय हो।। (भज. 119:23)
मैं तेरे उपदेशों और चितौनियों को मानता आया हूँ, क्योंकि मेरी सारी चाल चलन तेरे सम्मुख प्रगट है। परमेश्वर से सहायता पाने की लालसा ताव