मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियाँ करता रहूँ, और दिन भर अपने हृदय में दुःखित रहा करूँ13:2 दिन भर अपने हृदय में दुःखित रहा करूँ: प्रतिदिन लगातार दु:खी रहूँ। अर्थात् उसके कष्टों में अन्तराल नहीं था।?, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आँखों में ज्योति आने दे13:3 मेरी आँखों में ज्योति आने दे: मृत्यु के निकट आने पर आँखों की ज्योति कम हो जाती है और उसे ऐसा प्रतीत होता है कि मृत्यु निकट है। वह कहता है कि जब तक परमेश्वर हस्तक्षेप न करे अंधकार गहरा होता जाएगा।, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, “मैं उस पर प्रबल हो गया;” और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूँ तो मेरे शत्रु मगन हों।
भजन संहिता 13 · KJV Audio
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