यदि तू कहे, कि देख मैं इसको जानता न था, तो क्या मन का जाँचनेवाला इसे नहीं समझता? और क्या तेरे प्राणों का रक्षक इसे नहीं जानता? और क्या वह हर एक मनुष्य के काम का फल उसे न देगा? (मत्ती 16:27, रोम. 2:6, प्रका. 2:23, प्रका. 22:12)
हे मेरे पुत्र तू मधु खा, क्योंकि वह अच्छा है, और मधु का छत्ता भी, क्योंकि वह तेरे मुँह में मीठा लगेगा।
इसी रीति बुद्धि भी तुझे वैसी ही मीठी लगेगी; यदि तू उसे पा जाए तो अन्त में उसका फल भी मिलेगा, और तेरी आशा न टूटेगी।
तू दुष्ट के समान धर्मी के निवास को नष्ट करने के लिये घात में न बैठ24:15 धर्मी के निवास को नष्ट करने के लिये घात में न बैठ: इस नीतिवचन की शिक्षा मनुष्य को शिक्षा देती है कि धर्मी को घात न करें न ही उसकी धार्मिकता पर षड्यंत्र रचें।; और उसके विश्रामस्थान को मत उजाड़;
क्योंकि धर्मी चाहे सात बार गिरे तो भी उठ खड़ा होता है; परन्तु दुष्ट लोग विपत्ति में गिरकर पड़े ही रहते हैं।
क्योंकि बुरे मनुष्य को अन्त में24:20 अन्त में: जीवन कहने योग्य उसका जीवन नहीं है, उसे आशीष नहीं मिलती है। कुछ फल न मिलेगा, दुष्टों का दीपक बुझा दिया जाएगा।
हे मेरे पुत्र, यहोवा और राजा दोनों का भय मानना; और उनके विरुद्ध बलवा करनेवालों के साथ न मिलना; (1 पत. 2:17)
जो दुष्ट से कहता है कि तू निर्दोष है, उसको तो हर समाज के लोग श्राप देते और जाति-जाति के लोग धमकी देते हैं;
मत कह, “जैसा उसने मेरे साथ किया वैसा ही मैं भी उसके साथ करूँगा; और उसको उसके काम के अनुसार पलटा दूँगा।”
तो क्या देखा, कि वहाँ सब कहीं कटीले पेड़ भर गए हैं; और वह बिच्छू पौधों से ढँक गई है, और उसके पत्थर का बाड़ा गिर गया है।