जो धन झूठ के द्वारा प्राप्त हो, वह वायु से उड़ जानेवाला कुहरा है, उसके ढूँढ़नेवाले मृत्यु ही को ढूँढ़ते हैं।
जो उपद्रव दुष्ट लोग करते हैं, उससे उन्हीं का नाश होता है, क्योंकि वे न्याय का काम करने से इन्कार करते हैं।
जब ठट्ठा करनेवाले को दण्ड दिया जाता है, तब भोला बुद्धिमान हो जाता है; और जब बुद्धिमान को उपदेश दिया जाता है, तब वह ज्ञान प्राप्त करता है।
धर्मी जन दुष्टों के घराने पर बुद्धिमानी से विचार करता है, और परमेश्वर दुष्टों को बुराइयों में उलट देता है।
जो रागरंग से प्रीति रखता है, वह कंगाल हो जाता है; और जो दाखमधु पीने और तेल लगाने से प्रीति रखता है, वह धनी नहीं होता।
जो धर्म और कृपा का पीछा करता है21:21 जो धर्म और कृपा का पीछा करता है: जो धर्म का पालन करता है वह निश्चय ही उसे पाएगा परन्तु उसके अतिरिक्त वह “जीवन” एवं “सम्मान” भी पाएगा जिसकी वह खोज नहीं करता है।, वह जीवन, धर्म और महिमा भी पाता है।
दुष्ट मनुष्य अपना मुख कठोर करता है, और धर्मी अपनी चाल सीधी रखता है21:29 धर्मी अपनी चाल सीधी रखता है: एक ओर तो अपराध की कठोरता है, दूसरी ओर सत्यनिष्ठा का विश्वास है।