मैंने मूर्ख को जड़ पकड़ते देखा है5:3 मूर्ख को जड़ पकड़ते देखा है: एलीपज के कहने का अर्थ है समृद्धि परमेश्वर के अनुग्रह का प्रमाण नहीं परन्तु जब कुछ समय बाद समृद्धि नहीं रह जाति तो वह निश्चित प्रमाण है कि वह मनुष्य मन में दुष्ट था।; परन्तु अचानक मैंने उसके वासस्थान को धिक्कारा।
उसके खेत की उपज भूखे लोग खा लेते हैं, वरन् कँटीली बाड़ में से भी निकाल लेते हैं; और प्यासा उनके धन के लिये फंदा लगाता है।
परन्तु जैसे चिंगारियाँ ऊपर ही ऊपर को उड़ जाती हैं, वैसे ही मनुष्य कष्ट ही भोगने के लिये उत्पन्न हुआ है।
इसी रीति वह नम्र लोगों को ऊँचे स्थान पर बैठाता है, और शोक का पहरावा पहने हुए लोग ऊँचे पर पहुँचकर बचते हैं। (लूका 1:52,53, याकू. 4:10)
वह तो धूर्त लोगों की कल्पनाएँ व्यर्थ कर देता है5:12 वह तो धूर्त लोगों की कल्पनाएँ व्यर्थ कर देता है: वह उनकी योजना निरर्थक कर देता है और उनकी युक्तियों को व्यर्थ कर देता हैं।, और उनके हाथों से कुछ भी बन नहीं पड़ता।
वह बुद्धिमानों को उनकी धूर्तता ही में फँसाता है; और कुटिल लोगों की युक्ति दूर की जाती है। (1 कुरि. 3:19,20)
“देख, क्या ही धन्य वह मनुष्य, जिसको परमेश्वर ताड़ना देता है; इसलिए तू सर्वशक्तिमान की ताड़ना को तुच्छ मत जान।
क्योंकि वही घायल करता, और वही पट्टी भी बाँधता है; वही मारता है, और वही अपने हाथों से चंगा भी करता है।
वह तुझे छः विपत्तियों से छुड़ाएगा5:19 वह तुझे छः विपत्तियों से छुड़ाएगा: यहाँ छः का आंकड़ा अनन्त संख्या का बोधक है अर्थात् वह अनेक विपत्तियों में साथ देगा।; वरन् सात से भी तेरी कुछ हानि न होने पाएगी।