भजन संहिता 77:2

HINIRVभजन संहिता 77:2

संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शान्ति आई ही नहीं77:2 मुझ में शान्ति आई ही नहीं: मुझे शान्ति देनेवाली जितनी बातें मेरे मन में उभरी उन सब को मैंने त्याग दिया।।

eng_kjvPsalms 77:2

In the day of my trouble I sought the Lord: my sore ran in the night, and ceased not: my soul refused to be comforted.