भजन संहिता 127:2

HINIRVभजन संहिता 127:2

तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और कठोर परिश्रम की रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद प्रदान करता है।

eng_kjvPsalms 127:2

It is vain for you to rise up early, to sit up late, to eat the bread of sorrows: for so he giveth his beloved sleep.