HINIRV

व्यवस्थाविवरण 26:12

HINIRV

“तीसरे वर्ष जो दशमांश देने का वर्ष ठहरा है, जब तू अपनी सब भाँति की बढ़ती के दशमांश को निकाल चुके, तब उसे लेवीय, परदेशी, अनाथ, और विधवा को देना, कि वे तेरे फाटकों के भीतर खाकर तृप्त हों;

Study Tools

Original LanguageComing soon
DevotionalComing soon
DictionaryComing soon
TopicalComing soon
AtlasComing soon