परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक46:1 संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक: यहाँ सहायक अर्थात्, सहयोग एवं सहकारिता। संकट: अर्थात् तनाव और दुःख देनेवाली सब परिस्थितियाँ।।
एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात् परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
जाति-जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य-राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। (प्रका. 11:18, भज. 2:1)
वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
“चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ46:10 जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ: देखो मैंने क्या-क्या किया जो मेरे परमेश्वर होने का प्रमाण है।। मैं जातियों में महान हूँ, मैं पृथ्वी भर में महान हूँ!”
भजन संहिता 46 · KJV Audio
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