Chapter 129 of 150

भजन संहिता129

HINIRV

इस्राएल अब यह कहे, “मेरे बचपन से लोग मुझे बार बार क्लेश देते आए हैं,

मेरे बचपन से वे मुझ को बार बार क्लेश देते तो आए हैं, परन्तु मुझ पर प्रबल नहीं हुए।

हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया129:3 हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया: यह रूपक ही भूमि जोतने का है उसमें निहित विचार यह है कि कष्ट ऐसे हैं जैसे हल धरती का सीना चीरता है।, और लम्बी-लम्बी रेखाएँ की।”

यहोवा धर्मी है; उसने दुष्टों के फंदों को काट डाला है;

जितने सिय्योन से बैर रखते हैं, वे सब लज्जित हों, और पराजित होकर पीछे हट जाए!

वे छत पर की घास के समान हों, जो बढ़ने से पहले सूख जाती है;

जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता129:7 जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता: वह एकत्र करके मवेशियों के लिए नहीं रखी जाती जैसे मैदान की घास। ऐसे किसी काम के लिए वह व्यर्थ है या वह पूर्णतः निकम्मी है।, न पूलियों का कोई बाँधनेवाला अपनी अँकवार भर पाता है,

और न आने-जानेवाले यह कहते हैं, “यहोवा की आशीष तुम पर होवे! हम तुम को यहोवा के नाम से आशीर्वाद देते हैं!”

भजन संहिता 129 · KJV Audio
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भजन संहिता 129 (HINIRV) — EdenLecta