लोग यहोवा की करुणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!
क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है। (लूका 1:53, यिर्म. 31:25)
इसलिए कि वे परमेश्वर के वचनों के विरुद्ध चले107:11 इसलिए कि वे परमेश्वर के वचनों के विरुद्ध चले: परमेश्वर की आज्ञाओं के। उन्होंने उसकी आज्ञाएँ नहीं मानीं। राष्ट्रीय अवज्ञा के कारण वे बन्धुआई में गए थे।, और परमप्रधान की सम्मति को तुच्छ जाना।
लोग यहोवा की करुणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!
वह अपने वचन के द्वारा उनको चंगा करता107:20 वह अपने वचन के द्वारा उनको चंगा करता: उसने बस वचन से ही कर दिया। उसके लिए तो बस आज्ञा देने की बात थी और रोग उनमें से समाप्त हो गया। और जिस गड्ढे में वे पड़े हैं, उससे निकालता है। (भज. 147:15)
लोग यहोवा की करुणा के कारण और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें!
लोग यहोवा की करुणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें।
फिर विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं107:39 वे घटते और दब जाते हैं: अर्थात् सब कुछ परमेश्वर के हाथ में है। वह सब पर राज करता है और सब को निर्देश देता है। यदि समृद्धि है तो वह परमेश्वर से है यदि इसका विपरीत होता है तो वह भी परमेश्वर के हाथ में हैं। मनुष्य सदा ही समृद्ध नहीं रहता है।।