बुद्धि तो मार्ग के ऊँचे स्थानों पर, और चौराहों में खड़ी होती है8:2 खड़ी होती है: स्थानों का पूर्ण विवरण बुद्धि की शिक्षा के विज्ञापन और संचारण की ओर संकेत करता है।;
क्योंकि बुद्धि, बहुमूल्य रत्नों से भी अच्छी है, और सारी मनभावनी वस्तुओं में कोई भी उसके तुल्य नहीं है।
मैं जो बुद्धि हूँ, और मैं चतुराई में वास करती हूँ8:12 मैं जो बुद्धि हूँ, और मैं चतुराई में वास करती हूँ: बुद्धि सबसे पहले चेतावनी देती है फिर प्रतिज्ञा करती है परन्तु यहाँ वह न तो प्रतिज्ञा करती न ही डराती है परन्तु अपनी श्रेष्ठता में बोलती है।, और ज्ञान और विवेक को प्राप्त करती हूँ।
यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है। घमण्ड और अहंकार, बुरी चाल से, और उलट-फेर की बात से मैं बैर रखती हूँ।
जो मुझसे प्रेम रखते हैं, उनसे मैं भी प्रेम रखती हूँ, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठकर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं।
“यहोवा ने मुझे काम करने के आरम्भ में, वरन् अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहले उत्पन्न किया8:22 अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहले उत्पन्न किया: बुद्धि स्वयं को ब्रह्मांड की रचना से पूर्व का बताती है, सब पर उसकी मुहर है, वह परमेश्वर के साथ एक है परन्तु उसके प्रेम का पात्र होने के कारण उससे भिन्न है।।
जब पहाड़ और पहाड़ियाँ स्थिर न की गई थीं, तब ही से मैं उत्पन्न हुई। (यूह. 1:1,2, यूह. 17:24, कुलु. 1:17)
जब उसने समुद्र की सीमा ठहराई, कि जल उसकी आज्ञा का उल्लंघन न कर सके, और जब वह पृथ्वी की नींव की डोरी लगाता था,
तब मैं प्रधान कारीगर के समान उसके पास थी; और प्रतिदिन मैं उसकी प्रसन्नता थी, और हर समय उसके सामने आनन्दित रहती थी।
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता, वरन् मेरी डेवढ़ी पर प्रतिदिन खड़ा रहता, और मेरे द्वारों के खम्भों के पास दृष्टि लगाए रहता है।