हे मेरे पुत्र, हे मेरे निज पुत्र! हे मेरी मन्नतों के पुत्र31:2 मेरी मन्नतों के पुत्र: शमूएल और शिमशोन जैसे पुत्र जो प्रायः प्रार्थना द्वारा प्राप्त हुए। समर्पण की शपथ से अनुमोदित प्रार्थना।!
वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है।
वह बल और प्रताप का पहरावा पहने रहती है, और आनेवाले काल के विषय पर हँसती है31:25 आनेवाले काल के विषय पर हँसती है: अर्थात् वह चिन्तित होकर भविष्य को नहीं देखती परन्तु आत्म-विश्वास के साथ हर्ष से देखती है।।
वह बुद्धि की बात बोलती है31:26 वह बुद्धि की बात बोलती है: एक सच्ची पत्नी के मुख से निकलने वाले वचन श्रोताओं के लिए नियम निर्धारक मार्गदर्शन एवं निर्देशन स्वरूप होते हैं।, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
नीतिवचन 31 · KJV Audio
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