जो सिधाई से चलता वह यहोवा का भय माननेवाला है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता वह उसको तुच्छ जाननेवाला ठहरता है।
मूर्ख के मुँह में गर्व का अंकुर है14:3 मूर्ख के मुँह में गर्व का अंकुर है: अर्थात् मूर्ख की बोली में दिखाया गया घमण्ड एक छड़ी के रूप में है जिसके द्वारा वह अन्यों को और स्वयं को भी मार गिराता है।, परन्तु बुद्धिमान लोग अपने वचनों के द्वारा रक्षा पाते हैं।
ठट्ठा करनेवाला बुद्धि को ढूँढ़ता, परन्तु नहीं पाता, परन्तु समझवाले को ज्ञान सहज से मिलता है। (नीति. 17:24)
विवेकी मनुष्य की बुद्धि14:8 मनुष्य की बुद्धि: मनुष्य की बुद्धि की पराकाष्ठा है कि वह अपने मार्ग को समझे। मूढ़ता की चरम सीमा है स्वयं को धोखा देना। अपनी चाल को समझना है, परन्तु मूर्खों की मूर्खता छल करना है।
ऐसा मार्ग है14:12 ऐसा मार्ग है: मूर्ख की जीवनशैली है, अपने शोक पूरे करना, अपनी इच्छा के अनुसार जीना।, जो मनुष्य को ठीक जान पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता, वह पाप करता है, परन्तु जो दीन लोगों पर अनुग्रह करता, वह धन्य होता है।
जो बुरी युक्ति निकालते हैं, क्या वे भ्रम में नहीं पड़ते? परन्तु भली युक्ति निकालनेवालों से करुणा और सच्चाई का व्यवहार किया जाता है।
शान्त मन14:30 शान्त मन: इसका विपरीत ईर्ष्या है जो भस्म करनेवाले रोग के समान खा जाती है।, तन का जीवन है, परन्तु ईर्ष्या से हड्डियाँ भी गल जाती हैं।
जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है।