सुलैमान के नीतिवचन। बुद्धिमान सन्तान से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख सन्तान के कारण माता को शोक होता है।
जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं।
बुद्धिमान सन्तान धूपकाल में फसल बटोरता है, परन्तु जो सन्तान कटनी के समय भारी नींद में पड़ा रहता है10:5 जो सन्तान कटनी के समय भारी नींद में पड़ा रहता है: जब विपुल फसल कटनी के लिये तैयार हो तब सोना सबसे बड़ा आलस्य है।, वह लज्जा का कारण होता है।
जो खराई से चलता है वह निडर चलता है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता है उसकी चाल प्रगट हो जाती है। (प्रेरि. 13:10)
जो नैन से सैन करके बुरे काम के लिए इशारा करता है उससे औरों को दुःख होता है, और जो बकवादी मूर्ख है, उसका नाश होगा।
बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं10:12 प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं: पहले छिपा लेता है, प्रकट नहीं करता, फिर पापों को क्षमा करके उन्हें भूल जाता है।। (1 कुरि. 13:7, याकू. 5:20, 1 पत. 4:8)
जहाँ बहुत बातें होती हैं10:19 जहाँ बहुत बातें होती हैं: अर्थात् शब्दों की अधिकता से गलती सुधारी नहीं जा सकती। सुधार करनेवाले और अपराधी दोनों का चुप रहना अधिक उत्तम है।, वहाँ अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुँह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है।
मूर्ख को तो महापाप करना हँसी की बात जान पड़ती है, परन्तु समझवाले व्यक्ति के लिए बुद्धि प्रसन्नता का विषय है।