अंधियारा और मृत्यु की छाया उस पर रहे। बादल उस पर छाए रहें; और दिन को अंधेरा कर देनेवाली चीजें उसे डराएँ।
घोर अंधकार उस रात को पकड़े; वर्षा के दिनों के बीच वह आनन्द न करने पाए, और न महीनों में उसकी गिनती की जाए।
उसकी संध्या के तारे प्रकाश न दें; वह उजियाले की बाट जोहे पर वह उसे न मिले, वह भोर की पलकों को भी देखने न पाए;
ऐसा न होता तो मैं चुपचाप पड़ा रहता, मैं सोता रहता और विश्राम करता3:13 मैं सोता रहता और विश्राम करता: इसकी अपेक्षा कि कष्ट उठाता और तनाव ग्रस्त होता। अर्थात् पृथ्वी के राजाओं और राजकुमारों के साथ शान्त एवं सम्मानित विश्राम में होता।,
और मैं पृथ्वी के उन राजाओं और मंत्रियों के साथ3:14 राजाओं और मंत्रियों के साथ: महान एवं बुद्धिमान लोग आपातकालीन स्थिति में राजाओं को परामर्श देते थे। होता जिन्होंने अपने लिये सुनसान स्थान बनवा लिए,
या मैं असमय गिरे हुए गर्भ के समान हुआ होता, या ऐसे बच्चों के समान होता जिन्होंने उजियाले को कभी देखा ही न हो।
उसमें छोटे बड़े सब रहते हैं3:19 छोटे बड़े सब रहते हैं: वृद्ध एवं युवा, उच्च पदाधिकारी एवं नगण्य लोग मृत्यु सब को बराबर बना देती है।, और दास अपने स्वामी से स्वतंत्र रहता है।
उजियाला उस पुरुष को क्यों मिलता है जिसका मार्ग छिपा है, जिसके चारों ओर परमेश्वर ने घेरा बाँध दिया है?
क्योंकि जिस डरावनी बात से मैं डरता हूँ, वही मुझ पर आ पड़ती है, और जिस बात से मैं भय खाता हूँ वही मुझ पर आ जाती है।