“इसलिए हे समझवालों! मेरी सुनो, यह सम्भव नहीं कि परमेश्वर दुष्टता का काम करे, और सर्वशक्तिमान बुराई करे।
निःसन्देह परमेश्वर दुष्टता नहीं करता34:12 निःसन्देह परमेश्वर दुष्टता नहीं करता: अय्यूब से एलीहू की शिकायत का आधार था कि वह अपने सिद्धान्तों पर दृढ़ नहीं रहा अपने कष्टों के कारण विवश होकर उसने ऐसी बातें कह दीं जिनका अर्थ है कि परमेश्वर अनर्थ करता है। और न सर्वशक्तिमान अन्याय करता है।
जो न्याय का बैरी हो, क्या वह शासन करे?34:17 जो न्याय का बैरी हो, क्या वह शासन करे?: इस प्रश्न का अभिप्रेत अर्थ है कि जो अन्यायी है वह ब्रह्मांड का संचालन कैसे कर सकता है। जो पूर्ण धर्मी है, क्या तू उसे दुष्ट ठहराएगा?
परमेश्वर तो हाकिमों का पक्ष नहीं करता और धनी और कंगाल दोनों को अपने बनाए हुए जानकर उनमें कुछ भेद नहीं करता। (याकू. 2:1, रोम. 2:11, नीति. 22:2)
आधी रात को पल भर में वे मर जाते हैं, और प्रजा के लोग हिलाए जाते और जाते रहते हैं। और प्रतापी लोग बिना हाथ लगाए उठा लिए जाते हैं।
इसलिए कि वह उनके कामों को भली भाँति जानता है, वह उन्हें रात में ऐसा उलट देता है कि वे चूर-चूर हो जाते हैं।
जब वह चुप रहता है तो उसे कौन दोषी ठहरा सकता है? और जब वह मुँह फेर ले, तब कौन उसका दर्शन पा सकता है? जाति भर के साथ और अकेले मनुष्य, दोनों के साथ उसका बराबर व्यवहार है
जो कुछ मुझे नहीं सूझ पड़ता, वह तू मुझे सिखा दे; और यदि मैंने टेढ़ा काम किया हो, तो भविष्य में वैसा न करूँगा?’
क्या वह तेरे ही मन के अनुसार बदला पाए क्योंकि तू उससे अप्रसन्न है? क्योंकि तुझे निर्णय करना है, न कि मुझे; इस कारण जो कुछ तुझे समझ पड़ता है, वह कह दे।