तब उन तीनों पुरुषों ने यह देखकर कि अय्यूब अपनी दृष्टि में निर्दोष है32:1 अय्यूब अपनी दृष्टि में निर्दोष है: इसके मित्र उसके समक्ष इसलिए निरुत्तर नहीं हुए कि वह अपनी दृष्टि में निर्दोष है परन्तु इसलिए कि उनका विवाद उसे विवश नहीं कर पाया और उनके पास अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा था। उसको उत्तर देना छोड़ दिया।
और बूजी बारकेल का पुत्र एलीहू32:2 एलीहू: इस नाम का अर्थ है परमेश्वर ही वह है या यह शब्द सच्चे परमेश्वर या यहोवा के लिए प्रतिष्ठा गत काम में लिया जाता था इस नाम का अर्थ ऐसा भी है परमेश्वर मेरा परमेश्वर है जो राम के कुल का था, उसका क्रोध भड़क उठा। अय्यूब पर उसका क्रोध इसलिए भड़क उठा, कि उसने परमेश्वर को नहीं, अपने ही को निर्दोष ठहराया।
फिर अय्यूब के तीनों मित्रों के विरुद्ध भी उसका क्रोध इस कारण भड़का, कि वे अय्यूब को उत्तर न दे सके, तो भी उसको दोषी ठहराया।
तब बूजी बारकेल का पुत्र एलीहू कहने लगा, “मैं तो जवान हूँ, और तुम बहुत बूढ़े हो; इस कारण मैं रुका रहा, और अपना विचार तुम को बताने से डरता था।
परन्तु मनुष्य में आत्मा तो है ही, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपनी दी हुई साँस से उन्हें समझने की शक्ति देता है।
“मैं तो तुम्हारी बातें सुनने को ठहरा रहा, मैं तुम्हारे प्रमाण सुनने के लिये ठहरा रहा; जबकि तुम कहने के लिये शब्द ढूँढ़ते रहे।
मैं चित्त लगाकर तुम्हारी सुनता रहा। परन्तु किसी ने अय्यूब के पक्ष का खण्डन नहीं किया, और न उसकी बातों का उत्तर दिया।
तुम लोग मत समझो कि हमको ऐसी बुद्धि मिली है, कि उसका खण्डन मनुष्य नहीं परमेश्वर ही कर सकता है32:13 उसका खण्डन मनुष्य नहीं परमेश्वर ही कर सकता है: इसका अभिप्राय है कि परमेश्वर ही अय्यूब को उसके इस स्थान से विस्थापित कर सकता है और उस पर सत्य को प्रगट करके उसे दीन बना सकता है। मनुष्य का ज्ञान रह जाता है।।