“मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रुक सकती23:2 मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रुक सकती: मेरी आहें मेरे कष्टों के बराबर भी नहीं है। वे मेरे दु:खों की अभिव्यक्ति के लिए भी तो पूरी नहीं पड़ती है।, मेरे कष्ट मेरे कराहने से भारी है।
जब वह बाईं ओर काम करता है तब वह मुझे दिखाई नहीं देता; वह तो दाहिनी ओर ऐसा छिप जाता है, कि मुझे वह दिखाई ही नहीं पड़ता।
परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूँगा। (1 पत. 1:7)
उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैंने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जानकर सुरक्षित रखे।
परन्तु वह एक ही बात पर अड़ा रहता है, और कौन उसको उससे फिरा सकता है? जो कुछ उसका जी चाहता है वही वह करता है23:13 जो कुछ उसका जी चाहता है वही वह करता है: वह अपनी इच्छा ही पूरी करता है। न तो कोई उसका विरोध कर सकता है न ही उसे वश में कर सकता है। अत: उससे लड़ना व्यर्थ है।।