परन्तु तुम लोग झूठी बात के गढ़नेवाले हो; तुम सब के सब निकम्मे वैद्य हो13:4 तुम सब के सब निकम्मे वैद्य हो: उसके कहने का अभिप्राय था कि वे उसे शान्ति देने तो आए थे परन्तु उन्होंने जो कहा उसमें शान्ति देनेवाली तो कोई बात भी नहीं थी। वे रोगी के पास भेजे हुए वैद्द्यों के सदृश्य थे जो उसके पास आकर कुछ नहीं कर पाए।।
क्या यह भला होगा, कि वह तुम को जाँचे? क्या जैसा कोई मनुष्य को धोखा दे, वैसा ही तुम क्या उसको भी धोखा दोगे?
वह मुझे घात करेगा13:15 वह मुझे घात करेगा: परमेश्वर मेरे दु:खों और कष्टों को इतना बढ़ा दे कि मैं जीवित न रह पाऊँ। मैं देख सकता हूँ कि मैं आपदाओं के तीव्रता के सामने हूँ, परन्तु मैं फिर भी उनका सामना करने को तैयार हूँ।, मुझे कुछ आशा नहीं; तो भी मैं अपनी चाल-चलन का पक्ष लूँगा।
तू मेरे लिये कठिन दुःखों की आज्ञा देता है, और मेरी जवानी के अधर्म का फल13:26 मेरी जवानी के अधर्म का फल: मैंने अपनी युवावस्था में जो अपराध किए। अब वह शिकायत करता है कि परमेश्वर उन सब अपराधों को स्मरण करता है जो उसने पहले के दिनों में किए थे। मुझे भुगता देता है।
और मेरे पाँवों को काठ में ठोंकता, और मेरी सारी चाल-चलन देखता रहता है; और मेरे पाँवों की चारों ओर सीमा बाँध लेता है।