“इस्राएलियों से यह कहना कि मेरे लिये भेंट लाएँ; जितने अपनी इच्छा से देना चाहें उन्हीं सभी से मेरी भेंट लेना।
और वे मेरे लिये एक पवित्रस्थान बनाएँ, कि मैं उनके बीच निवास करूँ25:8 मैं उनके बीच निवास करूँ: यहाँ निवास-स्थान का उद्देश्य है जिसे निश्चित रूप से स्वयं परमेश्वर ने घोषित किया है। यही बात परमेश्वर की उपस्थिति उनके लोगों के बीच में हे, दर्शाती है।।
जो कुछ मैं तुझे दिखाता हूँ, अर्थात् निवास-स्थान और उसके सब सामान का नमूना, उसी के अनुसार तुम लोग उसे बनाना।
वे डंडे सन्दूक के कड़ों में लगे रहें; और उससे अलग न किए जाएँ25:15 उससे अलग न किए जाएँ: यह निर्देश सम्भवतः इसलिए दिया गया कि सन्दूक को हाथों से छूआ न जाए।।
और जो साक्षीपत्र25:16 साक्षीपत्र: दस आज्ञाओं की पत्थर पटियों को साक्षीपत्र कहा गया, और जिस सन्दूक में उन्हें रखा गया उन्हें साक्षीपत्र का सन्दूक कहा गया। मैं तुझे दूँगा उसे उसी सन्दूक में रखना।
एक करूब तो एक सिरे पर और दूसरा करूब दूसरे सिरे पर लगवाना; और करूबों को और प्रायश्चित के ढकने को उसके ही टुकड़े से बनाकर उसके दोनों सिरों पर लगवाना।
और उन करूबों के पंख ऊपर से ऐसे फैले हुए बनें कि प्रायश्चित का ढकना उनसे ढँपा रहे, और उनके मुख आमने-सामने और प्रायश्चित के ढकने की ओर रहें।
और प्रायश्चित के ढकने को सन्दूक के ऊपर लगवाना; और जो साक्षीपत्र मैं तुझे दूँगा उसे सन्दूक के भीतर रखना।
और मैं उसके ऊपर रहकर तुझ से मिला करूँगा; और इस्राएलियों के लिये जितनी आज्ञाएँ मुझ को तुझे देनी होंगी, उन सभी के विषय मैं प्रायश्चित के ढकने के ऊपर से और उन करूबों के बीच में से, जो साक्षीपत्र के सन्दूक पर होंगे, तुझ से वार्तालाप किया करूँगा।
और मेज पर मेरे आगे भेंट की रोटियाँ25:30 भेंट की रोटियाँ: इसमें बारह बड़ी अख़मीरी रोटियाँ थीं, जो की मेज पर दो ढेरों में रखी जाती थी और हर ढेर पर लोबान का सुनहरा कटोरा होता था। इसको हर सब्त के दिन बदला जाता था। नित्य रखा करना।
“फिर शुद्ध सोने की एक दीवट बनवाना। सोना ढलवा कर वह दीवट, पाये और डण्डी सहित बनाया जाए; उसके पुष्पकोष, गाँठ और फूल, सब एक ही टुकड़े के बनें;
और उसके किनारों से छः डालियाँ निकलें, तीन डालियाँ तो दीवट की एक ओर से और तीन डालियाँ उसकी दूसरी ओर से निकली हुई हों;
एक-एक डाली में बादाम के फूल के समान तीन-तीन पुष्पकोष, एक-एक गाँठ, और एक-एक फूल हों; दीवट से निकली हुई छहों डालियों का यही आकार या रूप हो;
और दीवट से निकली हुई छहों डालियों में से दो-दो डालियों के नीचे एक-एक गाँठ हो, वे दीवट समेत एक ही टुकड़े के बने हुए हों।
उनकी गाँठें और डालियाँ, सब दीवट समेत एक ही टुकड़े की हों, शुद्ध सोना ढलवा कर पूरा दीवट एक ही टुकड़े का बनवाना।