भोज के घर जाने से शोक ही के घर जाना उत्तम है; क्योंकि सब मनुष्यों का अन्त यही है, और जो जीवित है वह मन लगाकर इस पर सोचेगा।
बुद्धिमानों का मन शोक करनेवालों के घर की ओर लगा रहता है परन्तु मूर्खों का मन आनन्द करनेवालों के घर लगा रहता है।
क्योंकि मूर्ख की हँसी हाण्डी के नीचे जलते हुए काँटों ही चरचराहट7:6 काँटों ही चरचराहट: जब तक वह है आवाज करता है फिर भस्म हो जाता है। के समान होती है; यह भी व्यर्थ है।
निश्चय अंधेर से बुद्धिमान बावला हो जाता है7:7 अंधेर से बुद्धिमान बावला हो जाता है: बुद्धिमान मनुष्य ऊँचे पद पर आसीन होने के बाद यदि अत्याचार करे या अनुचित काम करे तो वह मूर्ख बन जाता है। यह पद अधिकार के उपयोग या धन संग्रह के विरुद्ध चेतावनी देता है।; और घूस से बुद्धि नाश होती है।
क्योंकि बुद्धि की आड़7:12 बुद्धि की आड़: अर्थात् जो अपनी बुद्धि के द्वारा बैरी से रक्षा करता है वह उतना ही अच्छा स्थान है जितना कि जो अपने धन से रक्षा करता है। रुपये की आड़ का काम देता है; परन्तु ज्ञान की श्रेष्ठता यह है कि बुद्धि से उसके रखनेवालों के प्राण की रक्षा होती है।
सुख के दिन सुख मान, और दुःख के दिन सोच; क्योंकि परमेश्वर ने दोनों को एक ही संग रखा है, जिससे मनुष्य अपने बाद होनेवाली किसी बात को न समझ सके।
अपने व्यर्थ जीवन में मैंने यह सब कुछ देखा है; कोई धर्मी अपने धार्मिकता का काम करते हुए नाश हो जाता है, और दुष्ट बुराई करते हुए दीर्घायु होता है।
यह अच्छा है कि तू इस बात को पकड़े रहे; और उस बात पर से भी हाथ न उठाए; क्योंकि जो परमेश्वर का भय मानता है वह इन सब कठिनाइयों से पार हो जाएगा।
वह जो दूर और अत्यन्त गहरा है7:24 वह जो दूर और अत्यन्त गहरा है: अर्थात् परमेश्वर के विधानानुसार जो घटनाएँ घटी है और गहरी है, उनका भेद कौन जान सकता है।, उसका भेद कौन पा सकता है?
मैंने अपना मन लगाया कि बुद्धि के विषय में जान लूँ; कि खोज निकालूँ और उसका भेद जानूँ, और कि दुष्टता की मूर्खता और मूर्खता जो निरा बावलापन है, को जानूँ।
और मैंने मृत्यु से भी अधिक दुःखदाई एक वस्तु पाई, अर्थात् वह स्त्री जिसका मन फंदा और जाल है और जिसके हाथ हथकड़ियाँ है; जिस पुरुष से परमेश्वर प्रसन्न है वही उससे बचेगा, परन्तु पापी उसका शिकार होगा।
जिसे मेरा मन अब तक ढूँढ़ रहा है, परन्तु नहीं पाया। हजार में से मैंने एक पुरुष को पाया, परन्तु उनमें एक भी स्त्री नहीं पाई।