इसके बाद दाऊद ने पलिश्तियों को जीतकर अपने अधीन कर लिया, और गाँवों समेत गत नगर को पलिश्तियों के हाथ से छीन लिया।
फिर उसने मोआबियों को भी जीत लिया18:2 उसने मोआबियों को भी जीत लिया: दाऊद ने बहुत अधिक मोआबियों को युद्ध में बन्दी बनाया। मोआबी तो दाऊद के मित्र थे, (1शमू. 22:3, 4) अतः उनसे युद्ध करने और उनके साथ ऐसा कठोर व्यवहार करने का कारण अज्ञात है।, और मोआबी दाऊद के अधीन होकर भेंट लाने लगे।
फिर जब सोबा का राजा हदादेजेर फरात महानद के पास अपना राज्य स्थिर करने को जा रहा था, तब दाऊद ने उसको हमात के पास जीत लिया।
दाऊद ने उससे एक हजार रथ, सात हजार सवार, और बीस हजार प्यादे हर लिए, और दाऊद ने सब रथवाले घोड़ों के घुटनों के पीछे की नस कटवाई, परन्तु एक सौ रथवाले घोड़े बचा रखे।
जब दमिश्क के अरामी, सोबा के राजा हदादेजेर की सहायता करने को आए, तब दाऊद ने अरामियों में से बाईस हजार पुरुष मारे।
तब दाऊद ने दमिश्क के अराम में सिपाहियों की चौकियाँ बैठाईं; अतः अरामी दाऊद के अधीन होकर भेंट ले आने लगे। और जहाँ-जहाँ दाऊद जाता, वहाँ-वहाँ यहोवा उसको जय दिलाता था।
और हदादेजेर के तिभत और कून नामक नगरों से दाऊद बहुत सा पीतल ले आया; और उसी से सुलैमान ने पीतल के हौद और खम्भों और पीतल के पात्रों को बनवाया।
तब उसने हदोराम नामक अपने पुत्र को दाऊद राजा के पास उसका कुशल क्षेम पूछने और उसे बधाई देने को भेजा, इसलिए कि उसने हदादेजेर से लड़कर उसे जीत लिया था; (क्योंकि हदादेजेर तोऊ से लड़ा करता था) और हदोराम सोने चाँदी और पीतल के सब प्रकार के पात्र लिये हुए आया।
इनको दाऊद राजा ने यहोवा के लिये पवित्र करके रखा, और वैसा ही उस सोने- चाँदी से भी किया जिसे सब जातियों से, अर्थात् एदोमियों, मोआबियों, अम्मोनियों, पलिश्तियों, और अमालेकियों से प्राप्त किया था।
तब उसने एदोम में सिपाहियों की चौकियाँ बैठाईं; और सब एदोमी दाऊद के अधीन हो गए। और दाऊद जहाँ-जहाँ जाता था वहाँ-वहाँ यहोवा उसको जय दिलाता था।