भजन संहिता 55:4

HINIRVभजन संहिता 55:4

मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है: बोझ से दबा और दु:खी अर्थात् बहुत व्यथित है।, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।

eng_kjvPsalms 55:4

My heart is sore pained within me: and the terrors of death are fallen upon me.